द पब्लिकेट, इंदौर। इंदौर मेट्रो को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत अब सवाल खड़े कर रही है। करोड़ों की लागत से बनी मेट्रो में यात्रियों की संख्या इतनी कम हो गई है कि अब उसे चलाने के लिए “सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स” जैसी योजनाओं का सहारा लेना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि जिस मेट्रो पर रोज करीब 8 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं, उसमें 100 यात्री भी मुश्किल से मिल पा रहे हैं।
अब मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने खाली कोच भरने के लिए नया तरीका निकाला है। इंदौर मेट्रो में अब बर्थडे पार्टी, वेडिंग एनिवर्सरी, प्री-वेडिंग शूट, फिल्म शूट और किटी पार्टी जैसे आयोजन किए जा सकेंगे। यानी जिस मेट्रो को शहर की लाइफलाइन बनना था, वह अब इवेंट स्पॉट में बदलती नजर आ रही है।
कॉरपोरेशन ने इसके लिए बाकायदा रेट भी तय कर दिए हैं। खड़ी मेट्रो में आयोजन के लिए 5 हजार रुपए प्रति घंटा और चलती मेट्रो में आयोजन के लिए 7 हजार रुपए प्रति घंटा शुल्क रखा गया है। बुकिंग कम से कम 15 दिन पहले करनी होगी और अधिकतम 50 लोगों को ही अनुमति मिलेगी। साथ ही 20 हजार रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करना होगा।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि यह “नॉन-फेयर रेवेन्यू” मॉडल है और दूसरे शहरों में भी लागू है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इंदौर मेट्रो में यात्रियों की संख्या इतनी कम क्यों हो गई? मई 2025 में शुरुआत के दौरान लोगों में उत्साह था, लेकिन अब ट्रेनें लगभग खाली दौड़ रही हैं।
फिलहाल मेट्रो सुपर कॉरिडोर के 6.3 किलोमीटर हिस्से में स्टेशन 3 से स्टेशन 6 तक ही संचालित हो रही है। सीमित रूट और शहर के मुख्य हिस्सों से कनेक्टिविटी नहीं होने के कारण आम लोग अब भी इसे नियमित परिवहन के रूप में नहीं अपना पाए हैं।
मेट्रो एमडी एस. कृष्ण चैतन्य ने इस पहल को “बदलती शहरी जीवनशैली” और “सांस्कृतिक जरूरतों” से जोड़कर पेश किया है, लेकिन विपक्ष और आम लोग इसे मेट्रो की नाकामी का संकेत मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या करोड़ों की परियोजना का मकसद अब सिर्फ फोटोशूट और पार्टियां रह गया है?

