द पब्लिकेट, इंदौर। प्लॉट दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। विजय नगर थाना पुलिस ने एक निजी कंपनी के डायरेक्टरों और एजेंटों के खिलाफ करोड़ों रुपये की संभावित ठगी के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि आरोपियों ने “ए.आर. सम सिटी” नाम से कॉलोनी विकसित करने का दावा कर लोगों से लाखों रुपये वसूले, लेकिन न तो कॉलोनी विकसित की गई और न ही खरीदारों को प्लॉट की रजिस्ट्री या कब्जा दिया गया।
पुलिस के अनुसार 5 मई 2026 को जनसुनवाई से प्राप्त शिकायतों के आधार पर विजय नगर थाने में अपराध दर्ज किया गया। मामले में प्रारंभिक जांच के बाद आरोपीगण के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ये हैं आरोपी
मामले में “रिलाय एग्रो इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड” कंपनी और उससे जुड़े लोगों को आरोपी बनाया गया है। आरोपियों में कंपनी के डायरेक्टर अखिलेश यादव पिता रामराज यादव निवासी महेश गार्ड लाइन, इंदौर तथा भगवती किराड़े उर्फ रिया पटेल पिता जगदीश किराड़े निवासी बड़वानी शामिल हैं। इसके अलावा इंद्रपाल यादव और मदन कहार को एजेंट/दलाल के रूप में नामजद किया गया है।
कंपनी का कार्यालय विजय नगर क्षेत्र स्थित रतनलोक कॉलोनी और अपोलो प्रीमियम के पास बताया गया है।

“ए.आर. सम सिटी” कॉलोनी का दिया झांसा
शिकायतकर्ता ममता मिश्रा निवासी बजरंग नगर, इंदौर ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2024 में आरोपियों ने देवास नाके के पास ग्राम ब्राह्मण पिपल्या, तहसील सांवेर में “ए.आर. सम सिटी” नामक कॉलोनी विकसित करने का प्रचार-प्रसार किया था। आरोपियों ने दावा किया कि कॉलोनी को टीएनसीपी और अन्य डेवलपमेंट परमिशन मिल चुकी है तथा रेरा संबंधी प्रक्रिया भी पूरी है।
इसी विश्वास में आकर ममता मिश्रा ने भूखंड क्रमांक 239 खरीदने के लिए सहमति दी। उन्हें 12×35 यानी करीब 420 वर्गफीट का प्लॉट 10 लाख 50 हजार रुपये में देने का प्रस्ताव दिया गया।
अलग-अलग किश्तों में वसूले 3.76 लाख रुपये
एफआईआर के मुताबिक ममता मिश्रा ने पहले 51 हजार रुपये बयाना राशि के रूप में जमा किए। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में किश्तों के जरिए कुल 3 लाख 76 हजार रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि यह राशि चेक और बैंक माध्यम से जमा कराई गई। भुगतान के बदले कंपनी ने अलॉटमेंट लेटर और रसीदें भी जारी कीं।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि यह रकम उन्होंने अपनी मां के सोने के गहने गिरवी रखकर जुटाई थी।

रजिस्ट्री के नाम पर लगातार बहाने
ममता मिश्रा का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने प्लॉट की रजिस्ट्री और कब्जा मांगा तो आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। कभी फाइल प्रोसेस में होने की बात कही गई तो कभी परमिशन लंबित होने का बहाना बनाया गया।
बाद में जब वे मौके पर पहुंचीं तो पता चला कि वहां कोई कॉलोनी विकसित ही नहीं हुई है। जमीन पर कृषि कार्य चल रहा था और विकास कार्य का कोई निशान नहीं था।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर भरोसा जीतने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने टीएनसीपी अनुमति, डेवलपमेंट परमिशन और रेरा से जुड़े दस्तावेज दिखाकर लोगों को भरोसे में लिया। बाद में पता चला कि कॉलोनी संबंधी दावे संदिग्ध थे। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सुनियोजित तरीके से जालसाजी कर निवेशकों से रकम वसूली गई।

दूसरी शिकायतकर्ता से भी 4.44 लाख रुपये लेने का आरोप
मामले में दूसरी शिकायतकर्ता रुचिता वर्मा निवासी पद्मावती कॉलोनी, इंदौर ने भी पुलिस को आवेदन दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने “ए.आर. सम सिटी” में भूखंड क्रमांक 222 खरीदने के लिए 4 लाख 44 हजार 600 रुपये डाउन पेमेंट के रूप में जमा किए थे।
रुचिता वर्मा के अनुसार उन्हें भी अलॉटमेंट लेटर और रसीदें दी गईं, लेकिन न तो कॉलोनी विकसित हुई और न ही रजिस्ट्री की गई। कई बार कंपनी कार्यालय जाने पर भी कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं मिला।
उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में रिया पटेल उर्फ भगवती किराड़े ने कंपनी के लेटरहेड पर राशि लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक पैसा वापस नहीं किया गया।
कई और पीड़ितों के सामने आने की संभावना
पुलिस दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ताओं ने यह भी बताया है कि इसी प्रकार अन्य लोगों के साथ भी प्लॉटिंग के नाम पर धोखाधड़ी की गई है। ऐसे मामलों के आवेदन अलग से संलग्न किए जाने की बात कही गई है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
पुलिस ने शुरू की जांच
विजय नगर थाना पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब कंपनी के दस्तावेज, जमीन की वास्तविक स्थिति, बैंक ट्रांजेक्शन, रेरा और टीएनसीपी अनुमति संबंधी दावों की जांच कर रही है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि आरोपियों ने कितने लोगों से रकम ली और कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ।

