अमेरिका के दो सप्ताह के IVLP दौरे से लौटे महापौर बोले- AI से नौकरियां खत्म नहीं होंगी, काम का स्वरूप बदलेगा
द पब्लिकेट, इंदौर। अमेरिका के दो सप्ताह के International Visitor Leadership Program (IVLP) दौरे से लौटे इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि AI अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, उद्योग, स्वास्थ्य, परिवहन और शहरों की गवर्नेंस तक पर इसका असर दिखाई देगा। ऐसे में AI को रोकने के बजाय उसे समझना, नियंत्रित करना और समाज के हित में इस्तेमाल करना जरूरी है। महापौर ने कहा कि अब इंदौर के लिए अगला बड़ा कदम AI हब और AI अवेयरनेस होना चाहिए।
पत्रकारों से चर्चा में भार्गव ने अमेरिका में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि IVLP के तहत भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, ताइवान, हांगकांग और नेपाल समेत करीब आठ देशों के 12 प्रतिनिधियों को अमेरिका के विभिन्न शहरों में AI से जुड़े कॉलेज, विश्वविद्यालय, कंपनियों और संस्थानों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अमेरिका में AI का मौजूदा विस्तार अचानक नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे पिछले 30-40 वर्षों में विकसित हुआ तकनीकी और संस्थागत अनुभव है।
सरकार से पहले इंडस्ट्री ने पकड़ी AI की राह
महापौर ने कहा कि अमेरिका में नई तकनीक के मामले में सरकार और भारत की कार्यप्रणाली से काफी अंतर है। भारत में सरकार अक्सर नीति, संसाधन और संस्थागत सहयोग के जरिए नई तकनीक को आगे बढ़ाती है, जबकि अमेरिका में कई मामलों में इंडस्ट्री और निजी क्षेत्र पहले प्रयोग शुरू करते हैं और बाद में जरूरत के मुताबिक सरकार नियम-कायदे तय करती है।
अमेरिका में फिलहाल AI के रेगुलेशन को लेकर भी बहस चल रही है कि पूरे देश में एक समान नियम हों या राज्यों और स्थानीय निकायों को अपने स्तर पर नियम बनाने की स्वतंत्रता मिले। कुछ शहरों में डेटा सेंटर तक को लेकर स्थानीय स्तर पर निर्णय लिए गए हैं।
AI को रोकना नहीं, समझना जरूरी
भार्गव ने कहा कि AI के साथ आने वाले बदलावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हर व्यक्ति को AI की बुनियादी जानकारी और उसके सही इस्तेमाल की समझ होना जरूरी है। शिक्षा से लेकर कारोबार और नौकरी से लेकर रोजमर्रा के काम तक AI का प्रभाव बढ़ेगा।
हालांकि उन्होंने AI के जोखिमों को लेकर भी सावधान किया। उनके मुताबिक जब तक मशीन इंसान के नियंत्रण में है, स्थिति अलग है, लेकिन यदि किसी स्तर पर मशीन स्वयं निर्णय लेने और नियंत्रण करने लगे तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इसलिए AI के साथ जिम्मेदार इस्तेमाल और प्रभावी नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है।
प्राइवेसी भी बड़ी चुनौती
अमेरिका में डिजिटल गवर्नेंस के बढ़ते इस्तेमाल का दूसरा पहलू नागरिकों की प्राइवेसी से जुड़ा है। शहरों में कैमरों, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और अन्य डिजिटल सिस्टम के जरिए सुरक्षा और निगरानी बढ़ाई जा रही है। वहीं नागरिक इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि उनकी गतिविधियों, वाहनों और पहचान से जुड़ा कितना डेटा एकत्र किया जा रहा है और उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है।
बोस्टन की AI पॉलिसी से इंदौर ले सकता है सीख
महापौर ने बताया कि बोस्टन सिटी गवर्नमेंट ने अपने स्तर पर AI पॉलिसी तैयार की है। इसमें यह तय करने का प्रयास किया गया है कि नगर निगम के कर्मचारी AI का इस्तेमाल किन कामों में कर सकते हैं, किन मामलों में सावधानी बरतनी होगी और किन क्षेत्रों में इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
भार्गव के मुताबिक इंदौर भी डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। डेटा डिजिटाइजेशन, नागरिक सेवाओं और शहर से जुड़ी जानकारियों के डिजिटल रिकॉर्ड के बाद अब AI के लिए भी व्यवस्थित मॉडल विकसित करने की जरूरत है।
AI से नौकरी नहीं, काम का स्वरूप बदलेगा
AI को लेकर युवाओं की रोजगार संबंधी चिंता पर महापौर ने कहा कि AI के कारण काम पूरी तरह खत्म नहीं होगा, बल्कि उसका स्वरूप बदलेगा। कुछ पारंपरिक नौकरियों की मांग कम हो सकती है, लेकिन Prompt Engineering, AI आधारित तकनीकी सेवाओं, रिसर्च, शिक्षा, स्वास्थ्य और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं को केवल पारंपरिक सॉफ्टवेयर नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय AI के साथ काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी। अमेरिका में आज भी अच्छे प्रोफेसर, डॉक्टर, शोधकर्ता और विशेषज्ञों के लिए अवसर मौजूद हैं।
शहरों की समस्याओं के समाधान में भी AI
AI का इस्तेमाल केवल कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। शहरों की ट्रैफिक व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन और नागरिक सुविधाओं में भी इसका इस्तेमाल बढ़ेगा। बोस्टन में बच्चों के सुरक्षित और कम समय में स्कूल आने-जाने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट पर काम किया जा रहा है।
अमेरिका के कई शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पैदल मार्ग और साइकिल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देकर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की कोशिश की जा रही है। इसका उद्देश्य शहर और नागरिकों, दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
तकनीक के बावजूद वहां भी हैं शहरों की चुनौतियां
भार्गव ने कहा कि अमेरिका तकनीकी रूप से विकसित होने के बावजूद होमलेसनेस और प्राइवेसी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि तकनीक अकेले शहरों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती। इसके लिए तकनीक के साथ बेहतर नीतियों और प्रभावी प्रशासनिक मॉडल की जरूरत होती है।
इंदौर को AI हब बनाने पर जोर
महापौर ने कहा कि भारत के लिए AI में बड़ा अवसर है। दुनिया में लगातार बढ़ रहे डेटा का इस्तेमाल रिसर्च, इंडस्ट्री और नए उत्पादों के विकास में किया जा सकता है। भारत में AI को लेकर तेजी से काम हो रहा है और इसी दिशा में इंदौर को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि इंदौर को AI हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम शुरू हो। इसके लिए शिक्षा संस्थानों, इंडस्ट्री, चैंबर ऑफ कॉमर्स और स्थानीय प्रशासन को एक साथ लाने की जरूरत है। भोपाल को भी इस पहल से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है।
AI Literacy को बनाया जाएगा अगला फोकस
भार्गव ने कहा कि आने वाले समय में केवल AI हब बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि AI Literacy और Awareness भी जरूरी है। लोगों को यह समझाना होगा कि AI क्या है, इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए और इसके दुरुपयोग से कैसे बचा जाए। इसमें सरकार के साथ मीडिया, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और सामाजिक संगठनों की भी भूमिका होगी।
अमेरिका से लौटने के बाद अपने अनुभव का सार बताते हुए महापौर ने कहा कि AI को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसे समझकर, नियंत्रित करके और समाज के हित में इस्तेमाल जरूर किया जा सकता है। इंदौर के पास इस दिशा में आगे बढ़ने की क्षमता है और अब शहर को AI के इस्तेमाल से आगे बढ़कर AI को समझने और सिखाने वाला शहर बनाने की जरूरत है।

