एक साल बाद भी कार्यकारिणी का इंतजार, बड़े नेताओं की पसंद और जातीय संतुलन के बीच फंसा फैसला

द पब्लिकेट, इंदौर।इंदौर ग्रामीण भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के जिलाध्यक्ष पद को लेकर संगठन के भीतर खींचतान तेज होती नजर आ रही है। युवा मोर्चा की प्रदेश टीम की घोषणा को करीब एक साल बीतने के बावजूद इंदौर ग्रामीण की कार्यकारिणी और जिलाध्यक्ष के नाम पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है। ऐसे में अब अध्यक्ष पद की दौड़ सिर्फ दावेदारों के बीच मुकाबला नहीं रह गई है, बल्कि इसके पीछे राजपूत बनाम यादव समीकरण, बड़े नेताओं की पसंद और संगठनात्मक संतुलन का सवाल भी जुड़ गया है।

मौजूदा समीकरण में राजपूत समाज के कई मजबूत नाम सामने हैं। अजय सिंह पवार केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा के करीबी माने जाते हैं और यह उनका तीसरा प्रयास बताया जा रहा है। वहीं दिलीप सिंह दरबार सांवेर विधायक तुलसी सिलावट के समर्थक और प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। केवल सिंह तंवर का विद्यार्थी परिषद में लंबा अनुभव है। उन्हें जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा के करीबी और प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर से अच्छे संबंध रखने वाला चेहरा माना जाता है। संगठन के भीतर उनकी दावेदारी को पैराशूट लैंडिंग वाले विकल्प के तौर पर भी चर्चा मिल रही है। जय बन्ना भाजपा नेता सावन सोनकर के करीबी बताए जाते हैं। युवा सरपंच होने के साथ विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि भी उनके पक्ष में बताई जा रही है।

हालांकि राजपूत समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल जातीय संतुलन का है। भाजपा के वर्तमान इंदौर ग्रामीण जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा और युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री घनश्याम चौहान दोनों राजपूत समाज से हैं। इसके अलावा पिछले दो कार्यकाल में युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भी इसी समाज से रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर राजपूत चेहरे को जिम्मेदारी देने पर संगठन के भीतर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती सामने आ सकती है।

दूसरी ओर यादव समाज से भी दावेदारों ने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। इनमें अंतिम ठाकुर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समधी और जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा के करीबी के तौर पर मजबूत दावेदार माना जा रहा है। महेश यादव महू विधायक उषा ठाकुर के करीबी बताए जाते हैं और वर्तमान में भाजपा मंडल अध्यक्ष हैं। उनकी दावेदारी के लिए उषा ठाकुर द्वारा भोपाल स्तर तक पैरोकारी किए जाने की चर्चा है। वहीं अजय यादव पूर्व मंडल अध्यक्ष रह चुके हैं और पूर्व विधायक जीतू जिराती के करीबी माने जाते हैं।

यादव समाज की दावेदारी ने मुकाबले को इसलिए भी दिलचस्प बना दिया है क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं यादव समाज से आते हैं। ऐसे में संगठन के सामने सवाल यह है कि फैसला क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता देकर होगा या मुख्यमंत्री के राजनीतिक प्रभाव को भी समीकरण में जगह मिलेगी।

इन दोनों प्रमुख समीकरणों के अलावा उमंग गुर्जर, विजेंद्र जाट, आशीष सालवी, विपिन राठौर, लक्की आदिवाल, विकास ठाकुर और शुभम शर्मा समेत कई अन्य युवा कार्यकर्ता भी दौड़ में बताए जा रहे हैं। यानी मुकाबला महज दो समाजों तक सीमित नहीं है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक चर्चाओं में यादव और राजपूत समीकरण सबसे ज्यादा चर्चा में है।

दावेदारी से ज्यादा अब ‘संतुलन’ का सवाल

युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष का पद संगठन के लिहाज से भविष्य की राजनीति का अहम पड़ाव माना जाता है। ऐसे में दावेदारों के साथ उनके राजनीतिक संरक्षकों, संगठनात्मक अनुभव, क्षेत्रीय पकड़ और सामाजिक समीकरणों को भी देखा जा रहा है। एक तरफ बड़े नेताओं के समर्थित चेहरों के बीच खींचतान है, तो दूसरी तरफ लंबे समय से संगठन के लिए जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता भी अपनी बारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अब असली परीक्षा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर और भाजपा संगठन की है। फैसला किसी एक चेहरे के पक्ष में होगा, लेकिन उसके साथ कई राजनीतिक संदेश भी जाएंगे। सवाल सिर्फ यह नहीं कि जिलाध्यक्ष कौन बनेगा, बल्कि यह है कि भाजपा इंदौर ग्रामीण में अगला युवा चेहरा चुनते समय जातीय संतुलन, गुटीय समीकरण और जमीनी कार्यकर्ताओं—इन तीनों के बीच कितना सामंजस्य बैठा पाती है।

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