• श्वेता जैन गैंग पर बड़ा खुलासा, रेशू के जरिए बनाए जाते थे अश्लील वीडियो; करोड़ों की ब्लैकमेलिंग का आरोप

द पब्लिकेट, इंदौर। इंदौर में सामने आया कथित “हनीट्रैप-2026” मामला अब सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार प्रदेश और दिल्ली के प्रभावशाली नेताओं तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। क्राइम ब्रांच की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन बताई जा रही है, जबकि “रेशू” नाम की युवती नेताओं और कारोबारियों को जाल में फंसाने का काम करती थी।

जांच एजेंसियों के अनुसार, रेशू पहले सोशल मीडिया और निजी संपर्कों के जरिए नेताओं से करीबी बढ़ाती थी, फिर निजी फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस को शक है कि इस गिरोह ने करोड़ों रुपये की उगाही की है।

दिल्ली के नेता से डेढ़ करोड़ वसूली का दावा

क्राइम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में श्वेता जैन ने खुलासा किया कि रेशू ने दीपावली के दौरान दिल्ली के एक बड़े राजनेता से करीब 1.5 करोड़ रुपये वसूले थे। बताया जा रहा है कि इस रकम से लग्जरी कार खरीदी गई और प्रॉपर्टी में निवेश भी किया गया।

इसके बाद गिरोह ने निमाड़ क्षेत्र के नेताओं और कारोबारियों को निशाना बनाना शुरू किया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ वीडियो कथित तौर पर कांग्रेस के एक बड़े नेता तक भी पहुंचाए गए थे।

जेल में हुई दोस्ती, बाहर आकर बनाया नेटवर्क

डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, पुलिस ने मंगलवार को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए श्वेता विजय जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। पूछताछ में श्वेता जैन ने कई अहम खुलासे किए हैं।

पुलिस जांच में सामने आया कि श्वेता की मुलाकात भोपाल के चर्चित हनीट्रैप केस के दौरान जेल में अलका दीक्षित से हुई थी। उस समय अलका शराब तस्करी के एक मामले में बंद थी। जेल में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और जमानत के बाद भी संपर्क बना रहा। इसके बाद दोनों ने मिलकर कथित तौर पर नेताओं और कारोबारियों को निशाना बनाना शुरू किया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, अलका लोगों से दोस्ती बढ़ाकर उन्हें जाल में फंसाती थी, जबकि श्वेता पूरे नेटवर्क को संचालित करती थी। पुलिस का दावा है कि इस गिरोह ने कई प्रभावशाली लोगों को ब्लैकमेल कर बड़ी रकम वसूली। मामले में अब कई और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

चिंटू ठाकुर केस से खुली परतें

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से एक करोड़ रुपये की उगाही की साजिश सामने आई। पुलिस ने इस मामले में श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी और जितेंद्र पुरोहित को गिरफ्तार कर कोर्ट से छह दिन की रिमांड ली है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि लाखन चौधरी प्रॉपर्टी डीलिंग की आड़ में लोगों से संपर्क बढ़ाता था और फिर उन्हें जाल में फंसाने की योजना बनाई जाती थी।

पुलिसकर्मी पर भी सवाल

मामले में इंटेलिजेंस विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा का नाम भी सामने आया है। आरोप है कि अलका दीक्षित ने उसे फोटो और वीडियो भेजकर सलाह मांगी थी कि इनका इस्तेमाल कैसे किया जाए। पुलिस अब उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

देवास निवासी जितेंद्र पुरोहित पर भी ब्लैकमेलिंग की रणनीति बताने और गिरोह के संपर्क में रहने के आरोप लगे हैं।

पुराने वीडियो और डेटा की तलाश

क्राइम ब्रांच अब अस्पताल और अन्य ठिकानों से मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल डेटा जब्त करने में जुटी है। पुलिस को शक है कि गिरोह के पास 2019 से जुड़े कई पुराने वीडियो और नेताओं-अफसरों की निजी जानकारी मौजूद है।

हालांकि कुछ अधिकारियों का कहना है कि कई वीडियो एआई तकनीक से भी तैयार किए गए हो सकते हैं, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

पुलिस की जांच कई बड़े नामों तक पहुंच सकती है

सूत्रों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे कर सकता है। जांच एजेंसियां अब उन नेताओं, कारोबारियों और अफसरों की सूची खंगाल रही हैं जो कथित तौर पर इस नेटवर्क के संपर्क में थे।

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