द पब्लिकेट, इंदौर। इंदौर में कल बड़ा प्रशानिक फेर बदल हुआ। लिस्ट में इंदौर शहरी थानों के सात टीआई इधर-उधर हुए। लिस्ट में जोन 2 के मलाईदार थाने लसूड़िया के प्रभारी तारेश सोनी का भी नाम था। जिसे देख लोगों का कहना है कि इनका समय हो गया था, लेकिन मामला यह नहीं। असल में जिस ठगोरे गौरव जैन के मामले में पांच पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी थी उसकी वहज से थाने का कप्तान भी निपट गया।

उल्लेखनीय है कि लसूड़िया पुलिस के पांच पुलिसकर्मी एक अप्रैल को दो साल के पेंडिंग चल रहे स्थाई वारंट तमिल करने ठगोरे गौरव जैन के घर उसे दबोचने पहुंचे थे। ठगोरे ने पुलिस को देख अंदर से दरवाजा लगा दिया था लेकिन पुलिस ने कारपेंटर को बुलाकर दरवाजा खुलवाया और गौरव को पकड़कर थाने ले गई। अगले दिन ग्वालियर पहुंचकर उसे कोर्ट को हवाले कर फुर्सत हो गई। लेकिन असली कहानी तब शुरू हुई जब ठगोरे ने पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत कर दी। मामला शहरभर में चर्चित हुआ। पुलिस पर लूट, मारपीट जैसे गंभीर घटनाओं का आरोप लगा। जांच में अटैच हुए पुलिसकर्मी अपने सबूतों को प्रस्तुत करते लेकिन शायद इस झूठी शिकायत की वजह से टीआई पर भी छींटे उड़े और उन्हें भी सात थाना प्रभारियों की लिस्ट में डालकर हटा दिया गया। 

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