द पब्लिकेट, इंदौर। भाजपा युवा मोर्चा में अध्यक्ष बनने की दौड़ तेज होते ही अब संगठन के गलियारों में चल रही कथित ‘व्यवस्थाओं’ की चर्चाओं ने सियासी माहौल गरमा दिया है। दावेदारों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पैनल में नाम आगे बढ़ाने वाले ‘भाईसाहब’ को खुश रखने के लिए कहीं नकद-नारायण तो कहीं जमीन की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, एक नंबर की विधानसभा से युवा मोर्चा नगर अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे एक कार्यकर्ता का नाम भी ऐसी ही चर्चाओं में सामने आया है। दावा है कि दावेदारी करने वाले कार्यकर्ता की ओर से ‘भाईसाहब’ की कथित व्यवस्था की गई है। चर्चा तो यहां तक है कि करीब दो माह पहले चितावद के आनंद नगर इलाके में लगभग 7 हजार वर्गफीट के प्लॉट की व्यवस्था की गई।
बताया जा रहा है कि इस पूरी व्यवस्था में दावेदार की बजाय उसके संपर्क में रहने वाले कथित सटोरियों और हवाला कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका रही। चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि उज्जैन में करीब एक करोड़ रुपए नकद दिए जाने से लेकर अलग-अलग लोगों के माध्यम से रकम जुटाने की बातें भी सामने आई हैं। हालांकि इन दावों के समर्थन में फिलहाल कोई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
सबसे गंभीर चर्चा प्लॉट को लेकर है। आरोप है कि वास्तविक प्लॉट करीब 4 हजार वर्गफीट का है, जबकि सरकारी जमीन समेत करीब 7 हजार वर्गफीट पर कब्जे की बात कही जा रही है। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल राजनीतिक ‘सेटिंग’ तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
अब सवाल यह है कि युवा मोर्चा अध्यक्ष पद की दावेदारी में आखिर किसकी ‘व्यवस्था’ किसके काम आएगी? क्या दावेदार को संगठन में पद मिलेगा और क्या कथित तौर पर व्यवस्था करने वालों को उसका राजनीतिक फायदा मिलेगा? या फिर पूरी कवायद सिर्फ राजनीतिक गलियारों में चल रही अफवाह साबित होगी?
इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन युवा मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर चल रही यह चर्चा भाजपा के अंदर पारदर्शिता और संगठनात्मक प्रक्रिया पर सवाल जरूर खड़े कर रही है।

