- ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के एवज में आश्रय निधि और विकास शुल्क की मांग; 2 से 5 करोड़ रुपए तक के नोटिस से मचा हड़कंप, नियमों की व्याख्या को लेकर निगम और बिल्डरों में टकराव
द पब्लिकेट, इंदौर। इंदौर में नगर निगम और बिल्डरों के बीच ईडब्ल्यूएस-एलआईजी आवास के एवज में आश्रय निधि एवं विकास शुल्क की वसूली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। निगम ने शहर में मल्टी और आवासीय प्रोजेक्ट विकसित करने वाले 70 से अधिक बिल्डरों को करीब 200 करोड़ रुपए की टैक्स वसूली के नोटिस जारी किए हैं। इनमें कई ऐसे बिल्डर भी शामिल हैं, जिनके प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं और उन्हें निगम से कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र भी मिल चुका है।
इन नोटिसों के आधार पर अब कई बिल्डरों ने नगर निगम की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। बताया जा रहा है कि नोटिस निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के 30 जून 2026 के आदेश के आधार पर जारी किए गए हैं।
बिक्री योग्य क्षेत्र की गाइडलाइन कीमत का 6 प्रतिशत शुल्क
नगर निगम ने मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी डेवलपमेंट) नियम-2021 का हवाला देते हुए बिल्डरों से बिक्री योग्य क्षेत्र की गाइडलाइन कीमत का 6 प्रतिशत शुल्क जमा कराने को कहा है। यह राशि ईडब्ल्यूएस और एलआईजी आवास के प्रावधान के बदले आश्रय निधि एवं विकास शुल्क के रूप में मांगी गई है।
नोटिसों के बाद बिल्डिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल है, क्योंकि अलग-अलग प्रोजेक्ट के हिसाब से कई बिल्डरों पर करोड़ों रुपए की देनदारी तय की गई है। कुछ बिल्डरों को करीब 2 करोड़ तो कुछ को 5 करोड़ रुपए तक के नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है।
बिल्डरों की आपत्ति- मल्टी को कॉलोनी मानना ही गलत
बिल्डरों का तर्क है कि उन्होंने अपनी जमीन पर मल्टी का निर्माण किया है और फ्लैट बेचे हैं। उनके अनुसार नियम में ईडब्ल्यूएस-एलआईजी का प्रावधान मुख्य रूप से उस स्थिति से जुड़ा है, जिसमें जमीन को टुकड़ों में बांटकर प्लॉट बेचे जाते हैं। ऐसे में मल्टी प्रोजेक्ट पर इसी प्रावधान के आधार पर करोड़ों रुपए की अतिरिक्त राशि मांगने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
बिल्डरों का यह भी कहना है कि आईडीए की योजनाओं में पहले से ईडब्ल्यूएस-एलआईजी का प्रावधान मौजूद है, ऐसे में अलग से आश्रय निधि और विकास शुल्क की मांग को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
क्रेडाई ने महापौर और निगमायुक्त के सामने उठाया मुद्दा
मामले को लेकर क्रेडाई ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन के अनुसार इस प्रकार के नोटिस इंदौर में ही जारी किए गए हैं। क्रेडाई प्रतिनिधियों ने मामले को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के समक्ष भी अपनी बात रखी है।
ये प्रमुख बिल्डर्स और संस्थाएं पहुंचीं हाईकोर्ट
नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ स्नेह डेवलपर्स, माइक्रोमेटी सायबरसिटी, वीटीएम इन्फ्रास्ट्रक्चर, अमृत इन्फ्रास्ट्रक्चर, शरद डोसी, अंबर बिल्डर्स, अमरलाल चुघ, राजेंद्र कुमार शुक्ला, मयंक इंटरप्राइजेस, करण सिंह छाबड़ा, श्रीमंत महाराजा तुकोजीराव पवार रिलीजियस एंड चैरिटेबल ट्रस्ट और एवी एस्टेट के दीपक कालरा समेत कई पक्ष हाईकोर्ट पहुंचे हैं।
अब पूरे मामले में हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल मध्यप्रदेश नगर पालिका (कॉलोनी डेवलपमेंट) नियम-2021 की व्याख्या और उसके तहत मल्टी प्रोजेक्ट पर ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के एवज में आश्रय निधि एवं विकास शुल्क की देनदारी का है। कोर्ट के निर्णय से यह भी स्पष्ट होगा कि पहले से पूर्ण हो चुके प्रोजेक्टों पर इस तरह की करोड़ों रुपए की मांग किस सीमा तक लागू की जा सकती है।

