द पब्लिकेट, इंदौर। करणी सेना सहित अन्य छात्र संगठनों ने दो दिन पहले शासकीय होलकर महाविद्यालय में प्रदर्शन करते हुए कथित “इंटर्नशिप घोटाले” का खुलासा किया। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रशासन, कुछ शिक्षक और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए।
छात्र नेता श्याम शुक्ला आरोप है कि Influx Sourcing Company के साथ वर्ष 2025-26 में कॉलेज द्वारा MOU साइन किया गया, जिसके बाद छात्रों पर जबरन इंटर्नशिप करने का दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि इंटर्नशिप के नाम पर पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और स्पोकन क्लासेस कराई गईं, लेकिन सर्टिफिकेट अलग कोर्स के दिए गए।
आंदोलनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों से प्लेसमेंट और इंटर्नशिप के नाम पर 3000 रुपए तक की राशि वसूली गई। चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इंटर्नशिप Influx Sourcing Company से कराई गई, जबकि प्रमाण पत्र VELP Consultancy Limited के नाम से जारी किए गए। वहीं, कंपनी की जानकारी गूगल से निकली तो पता चला कि इसका संचालन DAVV के प्लेसमेंट अधिकारी अवनीश व्यास करते है।

छात्रों के मुताबिक, कॉलेज के कुछ अधिकारी और शिक्षक व्हाट्सएप के माध्यम से लगातार मैसेज भेजकर अलग-अलग QR कोड के जरिए फीस जमा करने का दबाव बना रहे थे। वहीं, जिस पते पर इंटर्नशिप एजेंसी का ऑफिस बताया गया, वहां कोई कार्यालय नहीं मिला, जिससे एजेंसी के फर्जी होने की आशंका और गहरा गई है।

छात्र नेताओं ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनका इस कंपनी से संबंध होने की जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि फर्जी इंटर्नशिप एजेंसी को तत्काल बंद किया जाए, छात्रों से वसूली गई राशि वापस की जाए और उन्हें स्वतंत्र रूप से इंटर्नशिप करने की अनुमति दी जाए। साथ ही छात्रों के दस्तावेजों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की भी मांग की गई।

छात्र संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कुलगुरु, उच्च शिक्षा विभाग और लोकायुक्त से शिकायत करेंगे तथा जरूरत पड़ने पर भोपाल में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
छात्र नेता पर भी गंभीर आरोप
आरोपों के अनुसार, इंटर्नशिप संचालन “सौरभ शर्मा” को सौंपा गया, जो कथित तौर पर शासकीय होलकर महाविद्यालय में चार वर्षों तक अनुत्तीर्ण रहा है, जिस पर छात्र नेताओं ने सवाल उठाए हैं, वहीं प्रशासन के इनकार के बावजूद छात्रों को सयाजी होटल में प्लेसमेंट के नाम पर बुलाने और शिक्षकों द्वारा 3000 रुपए तक जमा कराने के दबाव के आरोप भी लगे हैं, जिसे नियमों के विरुद्ध बताया गया है। साथ ही “जयसवाल” की कथित कंपनी पर छात्रों के दस्तावेजों के दुरुपयोग कर करोड़ों के गबन का आरोप है और आशंका जताई गई है कि ऐसा ही खतरा आगे भी हो सकता है, इसलिए छात्र संगठनों ने संबंधित लोगों पर कार्रवाई, कंपनियों को बंद करने और पूरे मामले की जांच की मांग की है।


