द पब्लिकेट, इंदौर। सात महीने पहले आत्महत्या करने वाले शराब कारोबारी दिनेश मकवाना के चर्चित मामले में अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच तेज कर दी है। हाई कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई की टीम बुधवार को कनाडिया गांव पहुंची, जहां उसने मृतक के परिजनों से मुलाकात की और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र किए।
सीबीआई अधिकारियों ने दिनेश मकवाना की मां संतोषबाई मकवाना और परिवार के अन्य सदस्यों से चर्चा की। हालांकि संतोषबाई की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण उनके विस्तृत बयान नहीं हो सके। टीम ने कनाडिया थाने से मामले से संबंधित दस्तावेज और जांच रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में लिए हैं।
वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा था विवाद
दिनेश मकवाना ने करीब सात महीने पहले आत्महत्या कर ली थी। घटना के लगभग 27 दिन बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि देवास की आबकारी अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित को करीब 22 लाख रुपये रिश्वत देने के बावजूद उनसे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे। वीडियो में उन्होंने मानसिक प्रताड़ना और दबाव का भी उल्लेख किया था।
मकवाना देवास जिले के बागली, चापड़ा, डेहरिया साहू समेत पांच शराब दुकानों का संचालन करते थे। परिवार का आरोप है कि लगातार दबाव और कथित भ्रष्टाचार के कारण वह तनाव में थे और अंततः आत्महत्या करने को मजबूर हो गए।
हाई कोर्ट पहुंचा था मामला
परिजनों का आरोप था कि स्थानीय पुलिस मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही थी। इसी वजह से मृतक की मां संतोषबाई मकवाना ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की थी। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए, जिसके बाद एजेंसी ने आबकारी अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में शुरुआत से ही कनाडिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं। वीडियो सामने आने और परिजनों द्वारा गंभीर आरोप लगाने के बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मामले में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई, जबकि सभी बयान आबकारी अधिकारी की भूमिका की ओर इशारा कर रहे थे।
कारोबार और दबाव की कहानी
परिजनों के अनुसार, दिनेश मकवाना पहले एक शराब दुकान में सेल्समैन के रूप में काम करते थे। बाद में उन्होंने देवास जिले में शराब कारोबार शुरू किया, लेकिन कारोबार में आर्थिक चुनौतियों और कथित प्रशासनिक दबावों के चलते वे लगातार परेशान रहते थे। परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार अपनी परेशानी साझा की थी और इसी तनाव के बीच उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।
अब सीबीआई की जांच से परिजनों को उम्मीद है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होगी और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

