द पब्लिकेट, इंदौर। विजय नगर थाना क्षेत्र में एक फाइनेंस कंपनी के सुपरवाइजर पर लोन रिकवरी के नाम पर ग्राहकों और कर्मचारियों से रुपए लेकर कंपनी के खाते में जमा नहीं करने तथा फर्जी रसीदें जारी कर धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। कंपनी की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी दुर्गेश मीणा को हिरासत में लिया। उसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले से जुड़े दस्तावेज, रसीदों और लेनदेन की जांच कर रही है।
पुलिस को दिए गए आवेदन में कंपनी प्रबंधन ने बताया कि दुर्गेश मीणा कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था। आंतरिक जांच के दौरान सामने आया कि उसने लोन रिकवरी और अन्य मदों में कर्मचारियों एवं ग्राहकों से राशि प्राप्त की, लेकिन वह रकम कंपनी के बैंक खाते में जमा नहीं की। आरोप है कि कई लोगों को अधिकृत रसीद नहीं दी गई, जबकि कुछ को कथित तौर पर फर्जी और कूटरचित रसीदें देकर गुमराह किया गया।
सात लोगों से ₹32,700 लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार अब तक सात लोगों से राशि लेने की जानकारी सामने आई है। इनमें सुरेश चौहान से ₹3,000, आकाश भाभर से ₹8,400, प्रतीक सिंह से ₹3,600, शिवम जाटव से ₹2,500, विजय वैध से ₹3,200, रवींद्र राठौर से ₹5,000 और धरमसिंह परमार से ₹7,000 लिए जाने का उल्लेख है। इन सभी से प्राप्त राशि कुल ₹32,700 बताई गई है। कंपनी का दावा है कि इसके अलावा भी अन्य लोगों से रकम वसूली गई है, जिसकी जांच जारी है।
ग्राहकों से संपर्क कर खुद को बताता रहा कंपनी का प्रतिनिधि
कंपनी ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि नौकरी से अलग होने के बाद भी दुर्गेश मीणा के पास कंपनी के महत्वपूर्ण दस्तावेज, ग्राहकों की गोपनीय जानकारी, ग्राहक सूची और अन्य कार्यालयीन रिकॉर्ड मौजूद रहे। वह स्वयं को कंपनी का प्रतिनिधि बताकर ग्राहकों से संपर्क करता रहा और उनसे राशि वसूलता रहा, जिससे कंपनी की साख और ग्राहकों के हित प्रभावित हुए।
नौकरी से निकाला, पुलिस कर रही जांच
मामला सामने आने के बाद कंपनी ने आरोपी को नौकरी से हटा दिया। विजय नगर पुलिस का कहना है कि शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जांच में जो भी साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आरोपी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

