द पब्लिकेट से भव्य द्विवेदी, भारत/इंदौर। देश के सबसे संवेदनशील और बहुचर्चित धार्मिक विवादों में शामिल धार भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट की युगलपीठ ने ऐतिहासिक तत्परता दिखाते हुए अंतिम सुनवाई के महज दो दिन बाद फैसला सुना दिया। न्यायिक गलियारों में इस निर्णय को अभूतपूर्व माना जा रहा है, क्योंकि इतने बड़े और संवेदनशील मामले में इतनी कम अवधि में फैसला आना बेहद दुर्लभ है।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक कुमार अवस्थी की डिवीजन बेंच ने इस मामले की लगातार सुनवाई की। 4 अप्रैल से शुरू हुई सुनवाई 13 मई तक चली, जिसमें कुल 26 दिनों तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और मात्र 48 घंटे के भीतर अपना निर्णय सुना दिया।

भोजशाला विवाद वर्षों से देशभर में चर्चा का विषय रहा है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है। ऐसे संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व वाले मामले में अदालत की त्वरित सुनवाई और जल्द फैसला न्याय व्यवस्था की कार्यशैली को लेकर भी बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर इतने बड़े मामलों में अंतिम सुनवाई के बाद फैसला आने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग जाता है, लेकिन भोजशाला मामले में अदालत ने रिकॉर्ड समय में निर्णय देकर एक नया उदाहरण पेश किया है।

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