द पब्लिकेट, दतिया। दतिया के कांग्रेसी विधायक राजेंद्र भारती को कोर्ट ने धोखाधड़ी मामले में तीन साल की सजा सुनाई है जिसके बाद दतिया में विधायक की कुर्सी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है कि विधायक की दावेदारी अब किसके हाथों होगी।
आपको बता दें, राजेंदता भारती ने पिछले चुनाव में कत्तावर नेता नरोत्तम मिश्रा को आठ हज़ार आठ सो वोटों से चुनाव हराया था जिसके बाद मिश्रा लगातार महामाई की सेवा में लगकर अपनी विधायकी की कामना कर रहे थे। इसी बीच राजेंद्र भारती पर मामला दर्ज हो गया और कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी। हालांकि कोर्ट ने साठ दिन का समय दिया जिसमें राजेंद्र भर्ती अपने बचाव के लिए कोर्ट में आवेदन प्रस्तुत करना होगा। लेकिन बात की जाए दतिया की विधायकी की तो कुर्सी खाली होने पर उपचुनाव होना निश्चित है। अगर उपचुनाव हुए तो दतिया से नरोत्तम मिश्रा को वापस से दतिया के विधायक की कुर्सी मिल सकती है। सूत्रों बताते है कि कुछ ही दिनों में उपचुनाव होयेंगे और विधायक नरोत्तम मिश्रा को बनाया जाएगा।
यह है पूरा मामला
मध्य प्रदेश की दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हेराफेरी मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की स्पेशल MP-MLA कोर्ट ने गुरुवार को उन्हें दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। हालांकि कोर्ट ने उन्हें जमानत भी दे दी है। इस फैसले के बाद उनकी विधायकी पर खतरा मंडरा रहा है। मामले में सह-आरोपी रघुवीर प्रजापति को भी दोषी पाया गया है।
यह मामला वर्ष 1998 का है, जब भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन्होंने अपनी मां सावित्री श्याम के नाम पर 10 लाख रुपए की एफडी कराई थी, जिसकी अवधि तीन साल और ब्याज दर 13.5 प्रतिशत तय थी। आरोप है कि बाद में बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर एफडी की अवधि पहले 10 साल और फिर 15 साल कर दी गई, जबकि बाजार में ब्याज दरें घटती रहीं। इसके बावजूद लगातार 13.5 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जाता रहा, जिससे बैंक को नुकसान हुआ।
मामले का खुलासा साल 2011 में तब हुआ, जब भाजपा नेता पप्पू पुजारी बैंक अध्यक्ष बने। जांच में अनियमितता सामने आने पर एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज की गई। भुगतान नहीं मिलने पर भारती ने उपभोक्ता फोरम से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।
इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे की पहल पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया। केस में IPC की धारा 120B, 420, 467, 468 और 471 के तहत कार्रवाई की गई और बाद में मामला ग्वालियर से दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में स्थानांतरित हुआ।
कोर्ट ने विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई है, जिसमें कुल प्रभावी सजा तीन साल मानी जा रही है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर विधायक की सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में राजेंद्र भारती की विधायकी पर संकट गहरा गया है।
वहीं, विधायक के बेटे अनुज भारती ने बताया कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। यदि सजा पर रोक मिलती है तो उनकी सदस्यता बच सकती है। फिलहाल इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

