एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट, 12 नवंबर को मतदान; विधायकों के समर्थन से तय होगा जीत का गणित

द पब्लिकेट, भोपाल। मध्यप्रदेश की खाली राज्यसभा सीट को लेकर लंबे समय से चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को इस सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने उनके नाम पर मुहर लगाई है। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद यह सीट खाली हुई थी। अब भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही राज्यसभा उपचुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज होने की संभावना है।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान होगा। नामांकन की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है, जबकि 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 5 नवंबर तक नाम वापस ले सकेंगे। मतदान की जरूरत पड़ने पर 12 नवंबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे और शाम 5 बजे से मतगणना होगी।

तमिलनाडु में संगठन मजबूत करने के लिए मुरुगन ने छोड़ी थी सीट

एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री पद और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि वे तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करने को उन्होंने अपने लिए सम्मान की बात बताया था। मुरुगन ने कहा था कि लोकसभा चुनाव 2029 से पहले वे पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए अपना पूरा समय देना चाहते हैं।

कौन हैं हरदीप सिंह पुरी?

हरदीप सिंह पुरी केंद्र सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हैं। 15 फरवरी 1952 को दिल्ली में जन्मे पुरी राजनीति में आने से पहले भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी रहे हैं। वे 1974 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं और 2009 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

उन्होंने वर्ष 2014 में भाजपा की सदस्यता ली थी। इसके बाद केंद्र सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वे आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री के साथ नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का दायित्व निभा रहे हैं।

230 सदस्यीय विधानसभा में कैसे बनेगा जीत का गणित?

राज्यसभा चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती, बल्कि विधानसभा के निर्वाचित विधायक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। हालांकि, इस उपचुनाव में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान नहीं कर पाने की जानकारी के चलते प्रभावी मतों की संख्या पर इसका असर पड़ेगा।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए जरूरी मतों की संख्या केवल विधानसभा की कुल सदस्य संख्या से तय नहीं होती। इसके लिए मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या और लागू निर्वाचन नियमों के आधार पर कोटा निर्धारित किया जाता है। इसलिए इस सीट पर जीत के लिए आवश्यक मतों का सटीक आकलन चुनाव के समय प्रभावी सदस्य संख्या और मतदान की स्थिति के अनुसार करना होगा।

बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी राजनीतिक गणित के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वे खुद को कांग्रेस में बताती रही हैं, जबकि भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी भी चर्चा में रही है। उनके खिलाफ दलबदल से जुड़ा मामला चल रहा है। ऐसे में उनकी सदस्यता और मतदान की स्थिति को लेकर अंतिम तस्वीर स्पष्ट होने के बाद ही दोनों दलों के संख्याबल का सही आकलन किया जा सकेगा।

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की 11 सीटें

मध्यप्रदेश से राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद इनमें से एक सीट खाली हुई है। शेष सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद इस सीट के उपचुनाव पर सभी की नजरें रहेंगी।

राज्यसभा उपचुनाव में भाजपा की रणनीति, विधायकों का समर्थन और कांग्रेस का रुख महत्वपूर्ण होगा। नामांकन की अंतिम तारीख और चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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