द पब्लिकेट, इंदौर। इंदौर में दवाइयों और हर्बल प्रोडक्ट्स के नाम पर लोगों की सेहत से कथित खिलवाड़ का मामला सामने आया है। लसूड़िया थाना क्षेत्र के महालक्ष्मी नगर में एक साउगलर दवा कंपनी के कार्यालय में बड़ी संख्या में कैप्सूल, पाउडर और प्लास्टिक की बोतलें अव्यवस्थित हालत में मिलने का दावा किया गया है। मामले का खुलासा करने पहुंची एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया है कि वहां वीडियो बनाने के दौरान उसे धमकाया गया। इसके बाद पत्रकार ने लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
मोटापा, कुपोषण से लेकर बाल और स्किन केयर तक के प्रोडक्ट्स
जानकारी के मुताबिक, महिला पत्रकार को सूचना मिली थी कि महालक्ष्मी नगर क्षेत्र स्थित ए ब्लॉक रूम नंबर 102 में एक साउगलर कंपनी द्वारा विभिन्न बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए हर्बल दवाइयां अथवा प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं। इनमें मोटापा कम करने, कुपोषण, बाल झड़ने, स्किन केयर सहित अलग-अलग समस्याओं के लिए प्रोडक्ट्स शामिल बताए जा रहे हैं।
आरोप है कि अलग-अलग बीमारियों के नाम और पैकेजिंग के बावजूद इनके अंदर इस्तेमाल किया जाने वाला पाउडर एक जैसा दिखाई दे रहा था। कैप्सूल में भी पाउडर भरने का काम किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन प्रोडक्ट्स की वास्तविक सामग्री, गुणवत्ता और औषधीय मानकों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
बंद कमरे में बोरियों में मिला सामान
महिला पत्रकार अपनी टीम के साथ जब संबंधित कार्यालय पहुंची तो वहां का कथित दृश्य देखकर हैरान रह गई। एक कमरे में बोरियों के भीतर बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें, खुले कैप्सूल और पाउडर रखे होने का दावा किया गया है। इसके अलावा गत्ते के बक्सों में भी इसी तरह का सामान रखा हुआ बताया गया।
आरोप है कि जिन उत्पादों का इस्तेमाल सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है, उन्हें तैयार करने और रखने के लिए आवश्यक साफ-सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान नहीं रखा जा रहा था। यही वजह है कि पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो बनाने पर सुरक्षा गार्ड ने दी धमकी?
महिला पत्रकार के मुताबिक, जब वह कार्यालय के अंदर मौजूद सामान का वीडियो बना रही थी, तभी वहां मौजूद एक सुरक्षा गार्ड ने उसे कथित तौर पर धमकाया और वहां से जाने के लिए कहा। इसके बावजूद पत्रकार ने कुछ वीडियो रिकॉर्ड किए और बाद में मामले की शिकायत लेकर लसूड़िया थाने पहुंची।
अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन प्रोडक्ट्स में कौन-से पदार्थ इस्तेमाल किए जा रहे थे और क्या इन्हें तैयार करने वाली संस्था के पास आवश्यक लाइसेंस एवं अनुमति मौजूद है? क्या उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थे? इन सवालों का जवाब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही सामने आएगा।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन, मिलावटी या नकली दवा का निर्माण अथवा लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ साबित होता है, तो संबंधित संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
अब देखना यह होगा कि लसूड़िया पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की कितनी गंभीरता से जांच करते हैं और कथित दवा कारोबार के पीछे की वास्तविकता क्या सामने आती है।

