द पब्लिकेट, इंदौर। शहर में बच्चों और किशोरों के बीच कम कीमत वाले हाई-कैफीन बेवरेज की बढ़ती पहुंच अब चिंता का विषय बनती जा रही है। मीठे पानी में कैफीन और शकर की अधिक मात्रा मिलाकर बेचे जा रहे इन पेय पदार्थों को बाजार में एनर्जी ड्रिंक के तौर पर उतारा जा रहा है। महज 10 रुपए की 150 एमएल बोतल और करीब 30 रुपए की कैन अब मोहल्ले की छोटी-छोटी दुकानों तक आसानी से उपलब्ध है। यही कम कीमत और आसान उपलब्धता बच्चों-किशोरों को इनका ग्राहक बना रही है।
पहले मल्टीनेशनल कंपनियों के एनर्जी ड्रिंक 100 से 150 रुपए या उससे अधिक कीमत में बाजार में मिलते थे। लेकिन पिछले डेढ़ साल में कई छोटी कंपनियां भी हाई-कैफीन बेवरेज के बाजार में उतर आई हैं। सस्ती कीमत ने इस कारोबार को तेजी से फैलाने में मदद की है।
150 एमएल में 45 मिलीग्राम तक कैफीन
जानकारी के मुताबिक, 150 एमएल की बोतल में करीब 45 मिलीग्राम और 200 एमएल की कैन में 60 मिलीग्राम तक कैफीन मौजूद होता है। कैफीन और शकर का संयोजन कुछ समय के लिए शरीर और दिमाग को उत्तेजित करता है, जिससे पीने वाले को अच्छा महसूस होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार सेवन की आदत आगे चलकर निर्भरता का रूप ले सकती है।
इस बाजार में पहले करीब पांच बड़ी कंपनियां प्रमुख रूप से सक्रिय थीं, लेकिन अब छोटी कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर ऐसे उत्पाद बाजार में उतार दिए हैं। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार देश में पिछले साल करीब तीन अरब बोतलों की बिक्री हुई और इस बाजार के हर साल करीब 100 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। 2028 तक भारत में हाई-कैफीन बेवरेज का बाजार करीब 1.6 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मालवा-निमाड़ में भी इस तरह के बेवरेज का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान के मुताबिक यहां हर महीने करीब 10 करोड़ रुपए का बेवरेज बाजार है।
बच्चों के लिए गंभीर खतरा
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने एनर्जी ड्रिंक को लेकर एडवाइजरी जारी कर बच्चों और किशोरों को ऐसे पेय से दूर रखने की सलाह दी है। हाई-कैफीन ड्रिंक के सेवन से हृदय की धड़कन असामान्य होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, नींद में कमी और एंग्जायटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
इसके अलावा बेचैनी, पेट दर्द, गैस, दांतों की समस्या और मोटापे का खतरा भी बढ़ सकता है। अधिक शकर वाले ऐसे पेय पदार्थ लंबे समय तक सेवन किए जाने पर बच्चों के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं।
राजस्थान में बिक्री पर रोक, महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास प्रतिबंध
इस खतरे को देखते हुए राजस्थान में एनर्जी ड्रिंक के नाम से बिक रहे ऐसे पेय की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं महाराष्ट्र में स्कूलों के आसपास की दुकानों पर इनकी बिक्री पर रोक लगाई गई है।
इसके उलट मध्यप्रदेश में अभी कार्रवाई के लिए नई गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक इंदौर में ऐसे पेय पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं और उन्हें निर्धारित लैब में जांच के लिए भेजा गया। जांच रिपोर्ट एफएसएसएआई मुख्यालय को भेजी जा चुकी है।
बोतल पर चेतावनी, फिर भी बच्चों तक पहुंच
विडंबना यह है कि बाजार में बिक रही इन बोतलों पर खुद चेतावनी लिखी होती है कि बच्चे, गर्भवती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं इनका सेवन न करें। इसके बावजूद कम कीमत और मोहल्ले की दुकानों तक आसान उपलब्धता के कारण बच्चे और किशोर इन उत्पादों के संपर्क में आ रहे हैं।
‘इसे एनर्जी ड्रिंक कहना ही गलत’
पूर्व अधीक्षक चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय के डॉ. हेमंत जैन का कहना है कि शकर, सोडा और कैफीन वाले पेय को एनर्जी ड्रिंक कहना ही उचित नहीं है। उनके मुताबिक ऊर्जा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और पोषक तत्वों से मिलती है, जबकि कैफीन और शकर दिमाग को उत्तेजित करते हैं और बार-बार सेवन की इच्छा पैदा कर सकते हैं। बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को देखते हुए ऐसे पेय पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
‘सैंपल लेकर रिपोर्ट केंद्र को भेजी’
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मनीष स्वामी के मुताबिक केंद्र से निर्देश मिलने के बाद इंदौर में इस तरह के एनर्जी ड्रिंक के सैंपल लिए गए और निर्धारित लैब में उनकी जांच कराई गई। रिपोर्ट एफएसएसएआई मुख्यालय भेजी जा चुकी है। फिलहाल कार्रवाई के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिले हैं। आगे केंद्र से जो निर्देश प्राप्त होंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इन पेय पदार्थों पर बच्चों के सेवन को लेकर चेतावनी लिखी जा रही है, तो फिर ₹10-30 की कीमत में ये बच्चों की पहुंच तक कैसे पहुंच रहे हैं?

