द पब्लिकेट, इंदौर। मध्यप्रदेश को औद्योगिक हब बनाने और देश-विदेश के निवेशकों को प्रदेश में लाने के सरकारी प्रयासों के बीच इंदौर से सामने आया एक जमीन विवाद प्रशासनिक व्यवस्था और निवेशकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। एक कारोबारी ने आरोप लगाया है कि उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन का सौदा करने के बाद उसने 2.18 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया, लेकिन रकम लेने के बावजूद न तो जमीन की रजिस्ट्री की गई और न ही उसे कब्जा सौंपा गया। कारोबारी का दावा है कि शिकायतों के बावजूद करीब चार महीने से पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
16 हजार वर्गफीट जमीन का सौदा
मामला सांवेर क्षेत्र के ग्राम भंवरासला स्थित सर्वे नंबर 200/5/1 की करीब 16 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। कारोबारी विजय सिंह सोनगरा, निवासी स्नेहलतागंज, इस जमीन पर ट्रांसफॉर्मर का प्लांट स्थापित करना चाहते थे।
कारोबारी के अनुसार, 11 मार्च 2023 को उनकी जमीन के संबंध में सुरेश पिता विट्ठलराव पिंगले से मुलाकात हुई। बातचीत के बाद जमीन का सौदा 2 करोड़ 16 लाख 16 हजार रुपए में तय हुआ। कारोबारी का आरोप है कि सौदे की तय रकम से अधिक, कुल 2 करोड़ 18 लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान किया गया।
दावा है कि भुगतान आरटीजीएस और नकद के माध्यम से सुरेश पिंगले, उनके बेटे मयुरेश पिंगले और मैनेजर राजेश जैन को किया गया।
नकद रकम लेते समय डायरी में हस्ताक्षर का दावा
कारोबारी का आरोप है कि नकद रकम लेते समय संबंधित लोगों ने डायरी में हस्ताक्षर भी किए। पूरी रकम चुकाने के बाद जब रजिस्ट्री और जमीन का कब्जा देने की बात आई तो कथित तौर पर टालमटोल शुरू हो गई।
विजय सिंह का कहना है कि लंबे समय तक रजिस्ट्री नहीं की गई और जमीन का कब्जा भी नहीं सौंपा गया। जब उन्होंने अपने पैसे और जमीन को लेकर सवाल उठाए तो उनके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और दादागीरी की गई। कारोबारी ने जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया है।
चार महीने से पुलिस अधिकारियों के चक्कर
पीड़ित पक्ष के मुताबिक, पिछले करीब चार महीनों से वह मामले की शिकायत लेकर बाणगंगा थाने से लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक पहुंच चुका है। अधिकारियों को शिकायत और उससे जुड़े दस्तावेज सौंपने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
कारोबारी का दावा है कि उसके पास भुगतान से संबंधित बैंक रिकॉर्ड और नकद भुगतान के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं। उसका कहना है कि वह लंबे समय से अपने पैसे और जमीन के लिए न्याय की मांग कर रहा है।
राजनीतिक रसूख का भी लगाया आरोप
मामले में कारोबारी पक्ष ने मयुरेश पिंगले के भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े होने का हवाला देते हुए राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते पुलिस कार्रवाई से बच रही है और इसी वजह से अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
हालांकि, राजनीतिक संरक्षण और पुलिस पर प्रभाव डालने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी बाकी है।
निवेश के माहौल पर बड़ा सवाल
इंदौर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। ऐसे में किसी कारोबारी द्वारा करोड़ों रुपए के भुगतान के बाद जमीन की रजिस्ट्री और कब्जा नहीं मिलने तथा पुलिस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाए जाने से निवेशकों के भरोसे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार लगातार मध्यप्रदेश में नए उद्योग और निवेश लाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में जमीन से जुड़े विवादों में दस्तावेजों, बैंक लेनदेन, कथित नकद भुगतान और संबंधित पक्षों के बयानों की निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब पुलिस कार्रवाई का इंतजार
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कारोबारी द्वारा किए गए 2.18 करोड़ रुपए से अधिक के भुगतान के दावे और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कब होगी? क्या पुलिस शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करेगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
फिलहाल कारोबारी पुलिस और प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग कर रहा है। अब देखना यह है कि इस मामले में पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और करोड़ों रुपए के इस जमीन विवाद का सच क्या सामने आता है।

