द पब्लिकेट, इंदौर। लंबे समय से पुलिस महकमे में चर्चा का विषय रहे चर्चित ‘पॉकेट गवाह’ मामले में आखिरकार बड़ी विभागीय कार्रवाई की गई है। खजराना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी (टीआई) दिनेश वर्मा को इंस्पेक्टर पद से पदावनत कर सब-इंस्पेक्टर (एसआई) बना दिया गया है। पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के आदेश के अनुसार यह डिमोशन अगले तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद की गई, जिसमें सामने आया कि खजराना थाने में दर्ज सैकड़ों मामलों में बार-बार एक ही दो व्यक्तियों को पंच और गवाह बनाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि हत्या, लूट, दुष्कर्म, पॉक्सो, एनडीपीएस सहित कई गंभीर मामलों में भी इन्हीं कथित ‘पॉकेट गवाहों’ का इस्तेमाल किया गया, जिससे विवेचना की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
742 मामलों में इरशाद, 504 मामलों में नवीन बने गवाह
जांच रिपोर्ट के मुताबिक इरशाद नामक व्यक्ति को 742 मामलों में और नवीन नामक व्यक्ति को 504 मामलों में पुलिस गवाह बनाया गया। दोनों का उपयोग केवल सामान्य मामलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गंभीर अपराधों की जांच और पंचनामों में भी लगातार इन्हीं को शामिल किया गया।
इतनी बड़ी संख्या में एक ही व्यक्ति को बार-बार गवाह बनाए जाने पर सवाल उठे कि क्या प्रत्येक घटना के समय वही लोग मौके पर मौजूद थे, या फिर कानूनी प्रक्रिया केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह गई थी।
फर्जी हस्ताक्षरों के आरोप भी आए सामने
विभागीय जांच के दौरान कुछ मामलों में गवाहों के हस्ताक्षरों और कथित फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़े आरोप भी सामने आए। इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए तत्कालीन सीएसपी जयंत राठौर को पूरे मामले की जांच सौंपी गई।
जयंत राठौर की विस्तृत जांच रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक खामियां उजागर हुईं, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आयुक्त ने अंतिम निर्णय लेते हुए दंडात्मक कार्रवाई के आदेश जारी किए।
स्पष्टीकरण नहीं माना गया संतोषजनक
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि विभागीय जांच के दौरान दिनेश वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि पुलिस नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं का समुचित पालन नहीं किया गया, जिसके चलते यह कार्रवाई आवश्यक हो गई।
पुलिस महकमे को सख्त संदेश
इस कार्रवाई को इंदौर पुलिस में अनुशासन और जवाबदेही का बड़ा संदेश माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि विवेचना, पंचनामा और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

