द पब्लिकेट, भोपाल। वर्ष 2025 में लागू हुए नए वक्फ (संशोधन) अधिनियम के तहत मध्य प्रदेश ने देश में पहला राज्य बनने का दावा किया है, जिसने नए प्रावधानों के अनुरूप वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। राज्य सरकार ने 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का गठन किया है, जिसमें सनवर पटेल को चेयरमैन बनाया गया है। वहीं, नए कानून के तहत पहली बार दो हिंदू सदस्यों मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को भी बोर्ड में शामिल किया गया है।

सरकार के अनुसार, वक्फ (संशोधन) अधिनियम का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना, प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा विभिन्न वर्गों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। नए प्रावधानों के तहत महिलाओं, पिछड़े वर्गों और गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों को भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए वक्फ कानून के सुधारों को सबसे पहले लागू कर नई मिसाल पेश की है। उनके अनुसार, इससे वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, पारदर्शिता और जनहित को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ कानून में संशोधन को गरीब मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा, वक्फ संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था। राज्य सरकार का कहना है कि नए बोर्ड का गठन इसी सोच के अनुरूप किया गया है।

हालांकि, वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर देश के कुछ हिस्सों में राजनीतिक और कानूनी बहस भी जारी है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश ने नए कानून के अनुरूप बोर्ड का गठन कर देश में पहल करने वाला पहला राज्य बनने का दावा किया है।

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