द पब्लिकेट, धार/इंदौर। पवन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों (आइनॉक्स जीएफएल) InoxGFL/वाइब्रेंट एनर्जी (Vibrant Energy) और अत्रिवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Atriwal Infrastructure Ltd.) पर ठेकेदारों, वेंडरों और किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों का कहना है कि कंपनियां विभिन्न कार्यों के लिए छोटे ठेकेदारों और वेंडरों से काम करवाती हैं, लेकिन कार्य पूर्ण होने के बाद भुगतान में टालमटोल करती हैं, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित फर्म मां नागणेचा सिक्योरिटीज एंड डेवलपमेंट के प्रतिनिधियों का आरोप है कि उन्होंने दोनों कंपनियों के लिए विभिन्न स्थानों पर कार्य किया, लेकिन करोड़ों रुपये का भुगतान अब तक लंबित है। उनका कहना है कि भुगतान मांगने पर उन्हें दबाव और धमकियों का सामना भी करना पड़ा।
49 लाख के भुगतान विवाद का दावा
फर्म के अनुसार, अमझेरा थाना परिसर में हुई चर्चा के दौरान अत्रिवाल इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर से पहले किसी भी प्रकार की बकाया राशि से इनकार किया गया था। बाद में हिसाब-किताब में लगभग 49 लाख रुपये की राशि सामने आई। दावा किया गया कि इसमें से 32 लाख रुपये पर समझौता हुआ, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी केवल 5 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि 27 लाख रुपये अब भी बकाया हैं।
वाइब्रेंट एनर्जी पर भी लाखों रुपये बकाया होने का आरोप
फर्म का आरोप है कि वाइब्रेंट एनर्जी के लिए धार जिले में दो परियोजनाओं का कार्य कराया गया था, जिसका करीब 19 लाख रुपये भुगतान पिछले तीन वर्षों से लंबित है। इसके अलावा धार जिले में किए गए अन्य कार्यों की लगभग 46 लाख रुपये की राशि भी बकाया बताई जा रही है। फर्म ने यह भी दावा किया है कि उसने वाइब्रेंट एनर्जी के लिए आगर मालवा जिले में 32 लोकेशन पर कार्य किया था।
किसानों ने भी लगाए गंभीर आरोप
धार जिले की सरदारपुर तहसील के ग्राम सगवाल के कुछ किसानों ने आरोप लगाया है कि कंपनी द्वारा भूमि लीज पर लेने के बाद उन्हें खेती करने में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना खेतों में प्रवेश कर फसलों को नुकसान पहुंचाया गया। साथ ही उन्होंने प्रशासन पर भी निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप लगाया है।
“कई किसानों का कहना है कि उन्हें VIBRANT ENERGY के द्वारा आश्वासन दिया गया था कि परियोजना के अंतर्गत उन्हें 29 वर्ष 11 माह की अवधि के लिए गार्ड के पद पर रोजगार दिया जाएगा। किसानों का आरोप है कि बाद में यह आश्वासन पूरा नहीं किया गया और उन्हें नौकरी नहीं दी गई। इसके कारण प्रभावित किसानों में निराशा, आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। किसानों की मांग है कि संबंधित कंपनी एवं प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर किसानों को दिए गए आश्वासनों की सत्यता स्पष्ट करें तथा उचित कार्रवाई करें।”
किसानों का दावा है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिए, लेकिन अब तक उनकी शिकायतों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।

