द पब्लिकेट, डेस्क। आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ गंगा दशहरा मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में यह पर्व मां गंगा के धरती पर अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के बाद मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं, लेकिन उनके तेज प्रवाह को संभालने के लिए भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया था। इसी कारण गंगा दशहरा पर मां गंगा के साथ महादेव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
क्यों खास है गंगा दशहरा?
ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। “दशहरा” का अर्थ है दस पापों का नाश। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप समाप्त होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
महादेव से जुड़ी मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार मां गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि पृथ्वी उसका भार सहन नहीं कर सकती थी। तब भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में समाहित कर उनके प्रवाह को नियंत्रित किया। इसलिए गंगा दशहरा पर शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने और “हर हर गंगे, हर हर महादेव” के जयकारे लगाने की परंपरा है।
पूजा और दान का महत्व
- सुबह स्नान कर मां गंगा और भगवान शिव की पूजा करें
- शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें
- गंगा स्तोत्र और शिव चालीसा का पाठ करें
- जरूरतमंदों को जल, फल, शरबत और वस्त्र का दान दें
घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, उज्जैन समेत कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मंदिरों और घाटों पर विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात के इंतजाम किए हैं।

