द पब्लिकेट, इंदौर। जोन के थानों और स्टाफ को मेंटेन करने वाले डीसीपी साहब ही अगर बिना जांच किए उन्हीं के स्टाफ को सस्पेंड कर देंगे तो इससे सिर्फ एक थाने का नहीं बल्कि पूरे विभाग का मनोबल टूटेगा। यह हम नहीं शहर के हर पुलिसवाले का कहना है जिनके सामने लसूड़िया थाने के पांच पुलिसकर्मी दोषी न होने पर भी सस्पेंड कर दिए गए। अरे जो पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए वह तो बस अपनी ड्यूटी करने गए थे। बकायदा जिस गौरव जैन का वारंट दो साल से तमिल हुआ था उसे भी पकड़कर ग्वालियर भेजा उसके बाद भी खामियाजा भुगतना पड़ा।
उल्लेखनीय है कि जोन 2 के लसूड़िया थाने के पांच पुलिसकर्मी एसआई संजय बिश्नोई, दीपेंद्र मिश्रा, प्रणीत भदौरिया, रविन्द्र कुशवाह और दिनेश गुर्जर पर आरोपी गौरव पिता विमल जैन निवासी स्कीम नंबर 114 के घर जाकर 22 ग्राम सोना लूटने, मारपीट और धमकी देने के आरोप लगे है। लेकिन द पब्लिकेट आपको इस घटना की पूरी सच्चाई बताएगा…
असल में, एक अप्रैल की रात करीब साढ़े ग्यारह बजे एसआई संजय बिश्नोई को पता चला था कि ग्वालियर से फरार बदमाश गौरव जैन स्कीम नंबर 114 स्थित अपने फ्लैट में छुपा है। जानकारी मिलते ही एसआई बिश्नोई टीम के साथ फ्लैट पहुंचे तो देखा कि बाहर ताला लगा है, लेकिन सूचना सटीक थी और पता था कि बदमाश गौरव अंदर है। उसे किसी भी हालत में पकड़ना था इसलिए पुलिस ने दरवाजा तोड़ने के लिए रात में ही कारपेंटर को बुलवाकर पहले मेन दरवाजा तोड़ा फिर जिस कमरे में गौरव अपनी दो साल की बच्ची के साथ था उसे भी खुलवाया। कहीं किसी प्रकार का आरोप न लगे इसलिए इस पूरी घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जिसमें साफ दिख रहा है की गौरव जैन कमरे के अंदर है। गौरव को पकड़ने के बाद पुलिस ने तुरंत पंचमाना बनाया। गवाही कारपेंटर की ली ताकि कल से पुलिस पर दाग न लगे। अगले दिन यानी दो तारीख को पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी लेकर राजेश शर्मा के साथ ग्वालियर पहुंचाया। तीन को सुबह कोर्ट में उसे पेश किया जिसके बाद लसूड़िया पुलिस का काम खत्म हुआ लेकिन कुछ दिन पहले ही बदमाश गौरव जमानत पर बाहर आया और लसूड़िया पुलिस पर गंभीर आरोप लगा दिए। विभागीय सूत्रों ने बताया बदमाश गौरव गिरफ्तारी से इतना बरगलाया था कि उसने थाने में पकड़ने गए पुलिसकर्मियों को 15 दिन के अंदर देख लेने की धमकी दी थी।
डीसीपी से एक्शन से हर कोई नाराज
डीसीपी जोन 2 प्रतीक कुमार के पास जब लसूड़िया थाने के पांच पुलिसकर्मियों की शिकायत पहुंची तो उन्होंने तुरंत सस्पेंड कर दिया, जबकि पुलिस सीआरपीसी की धारा 47 अब बीएनएसएस की धारा 51 हो गई है। इसमें साफ लिखा है कि मुलजिम की गिर तारी के लिए दरवाजा तोड़ा जा सकता है। घर में अगर महिला है तो उन्हें बाहर निकलने का कहा जाएगा। सीआरपीसी की धारा 46(2) अब बीएनएसएस की धारा 43 (2) हो गई है। इसमें तो इतना तक कहा गया है कि मुलजिम अगर पुलिस गिरफ्तारी का विरोध करे और बचने की कोशिश करे तो आवश्यक बल प्रयोग किया जा सकता है।
आपको जानकारी हैरानी होगी कि जिस गौरव जैन ने पुलिस पर आरोप लगाए है वह खुद आपराधिक प्रवर्ती का है। बदमाश गौरव पर आबकारी, मारपीट, जान से मारने की धमकी और चेक बाउंस जैसे मामले दर्ज है। इंदौर के अलावा अन्य शहरों में भी वह अपनी बदमाशी के कारनामे करने में पीछे नहीं है। वहीं, गौरव की पत्नी भी उसके साथ बराबरी से इन मामलों में साथ देती है।

