द पब्लिकेट, नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित Tata Consultancy Services (TCS) के ऑफिस से जुड़ा यौन उत्पीड़न का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ महिला कर्मचारियों द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने कुल 9 एफआईआर दर्ज की हैं। मामले में एक महिला समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक अन्य महिला आरोपी अभी फरार बताई जा रही है।
शिकायतकर्ताओं ने अपने वरिष्ठ सहकर्मियों पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही, कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग पर शिकायतों को नजरअंदाज करने और दबाने का भी आरोप लगाया गया है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों की पहचान दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ आफताब अंसारी के रूप में हुई है। इसके अलावा एक महिला प्रबंधक (ऑपरेशन) निदा खान को भी आरोपी बनाया गया है।
कैसे शुरू हुआ मामला
एफआईआर के अनुसार, एक पीड़िता जो वर्ष 2023 से कंपनी में एसोसिएट के रूप में कार्यरत है, उसकी पहचान 2022 में एक आरोपी से हुई थी। आरोपी ने उसे नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसी दौरान उससे नजदीकियां बढ़ाईं। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। बाद में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसके बच्चे भी हैं।
ऑफिस के अंदर बढ़ता दबाव
पीड़िता ने बताया कि कंपनी में शामिल होने के बाद आरोपी के अन्य साथियों ने भी उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया। एफआईआर में आरोप है कि उसे बार-बार धर्म को लेकर अपमानजनक बातें कही गईं, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया और निजी जीवन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।
एक अन्य गंभीर आरोप यह भी है कि पीड़िता को एक रिजॉर्ट में ले जाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। वहीं, आरोपी के सहयोगियों द्वारा परिवार को बताने की धमकी देकर भी संबंध बनाने का दबाव डाला गया।
9 एफआईआर में सामने आए अलग-अलग आरोप
इस मामले की सभी एफआईआर में अलग-अलग प्रकार के आरोप दर्ज हैं, जिनमें शामिल हैं:
- यौन शोषण और छेड़छाड़
- शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना
- धार्मिक भावनाएं आहत करना और धर्म परिवर्तन का दबाव
- कार्यस्थल पर अश्लील टिप्पणियां और अनुचित स्पर्श
- पीछा करना, धमकी देना और मानसिक प्रताड़ना
- एचआर विभाग पर शिकायत दबाने के आरोप
डिलीवरी पार्टनर और ईमेल कनेक्शन
जांच के दौरान एक महिला डिलीवरी पार्टनर की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कंपनी सर्वर से उसे 78 ईमेल भेजे गए, जिनकी जांच की जा रही है। आरोप है कि उसने पीड़ितों की मदद करने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया। हालांकि उसके वकील ने सभी आरोपों से इनकार किया है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने रिटायर्ड जज साधना जाधव की अध्यक्षता में फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है, जो 17 अप्रैल को घटनास्थल का दौरा करेगी।
कंपनी का पक्ष
TCS ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि कंपनी में किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” लागू है। मामले की जानकारी मिलते ही आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रही है।
यह मामला न सिर्फ एक कंपनी, बल्कि पूरे कॉर्पोरेट वर्क कल्चर पर सवाल खड़े कर रहा है। महिलाओं की सुरक्षा, शिकायत तंत्र की पारदर्शिता और कार्यस्थल की जवाबदेही को लेकर अब बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

