द पब्लिकेट, भोपाल। प्रदेश में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। राजधानी स्थित वल्लभ भवन समेत सभी प्रमुख शासकीय कार्यालयों में समयपालन को लेकर औचक निरीक्षण के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्पष्ट संदेश है—सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी अधिकारी-कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित होगी, अन्यथा कड़ी कार्रवाई तय है।

विशेष टीमों का गठन, औचक निरीक्षण शुरू

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने विशेष टीमें गठित कर दी हैं, जो विभिन्न विभागों में पहुंचकर उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और कार्यालय में मौजूदगी की जांच करेंगी। विंध्याचल और सतपुड़ा भवन सहित अन्य शासकीय परिसरों में भी यह अभियान चलाया जाएगा।

इन टीमों को अनधिकृत अनुपस्थिति, देरी से पहुंचने और समय से पहले कार्यालय छोड़ने जैसी शिकायतों पर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जनकार्य में देरी बर्दाश्त नहीं

मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं, राजस्व, नगरीय प्रशासन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या लेटलतीफी स्वीकार नहीं की जाएगी। आम जनता को समय पर सेवाएं मिलें, इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

सरकार का मानना है कि समयपालन से न केवल कार्यों की गति बढ़ेगी, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन भी मजबूत होगा। आम नागरिकों को अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए प्रत्येक विभाग को समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा और जिन अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यशैली संतोषजनक नहीं पाई जाएगी, उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

संदेश साफ है, सरकारी दफ्तरों में अब ढिलाई नहीं, समय पर काम ही प्राथमिकता है।

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