द पब्लिकेट, मध्य प्रदेश। मकर संक्रांति का पर्व मध्य प्रदेश में दो परिवारों के लिए मातम में बदल गया। प्रतिबंधित चाइनीज मांझे और लापरवाही भरी पतंगबाजी के चलते प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में हुए हादसों में दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि इंदौर, उज्जैन और इटारसी में सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसों की यह श्रृंखला एक बार फिर प्रशासन की सख्ती और जन-जागरूकता पर सवाल खड़े करती है।

इंदौर में चार लोग घायल, गले और चेहरे पर गंभीर कट

पहला मामला इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र का है। तीन इमली इलाके में बाइक से जा रहे हेमराज चौरसिया का चाइनीज मांझे से गला कट गया। सड़क पर खून फैल गया। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हेमराज चांदमारी ईंट भट्टा क्षेत्र के निवासी हैं और पेट्रोल पंप पर काम करते हैं। वे मांगलिया में रिश्तेदार के यहां जा रहे थे।

दूसरी घटना परदेशीपुरा थाना क्षेत्र के नंदानगर की है, जहां महेश सोनी का चाइनीज मांझे से गला कट गया। उन्हें भी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तीसरा हादसा जूनी इंदौर ब्रिज पर हुआ। तिल्लौर निवासी प्रेम भंडारी दूध बांटने जा रहे थे, तभी अचानक सामने चाइनीज मांझा आ गया। उनके गले में 8 टांके लगाने पड़े।

चौथी घटना रामानंद नगर की है, जहां धनश्याम वसुनिया के चेहरे पर चाइनीज मांझे से गंभीर चोट आई। करीब 10 टांके आए हैं। उन्होंने बताया कि वह पतंग खरीदने जा रहे थे, तभी मांझा सामने आ गया और उनकी दाढ़ी तक कट गई।

उज्जैन में युवक का गला कटा, महिला के पैर जख्मी

उज्जैन में भी प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने कहर बरपाया। यहां एक युवक का गला कट गया, जबकि एक महिला के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। दोनों को चरक भवन अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रीवा और पन्ना में दो बच्चों की दर्दनाक मौत

रीवा में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाते समय 15 वर्षीय कुश चौरसिया हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

वहीं पन्ना जिले के धरमपुर थाना क्षेत्र के इयोलिया गांव में 15 वर्षीय विभव सिंह पतंग उड़ाते समय संतुलन बिगड़ने से चट्टान के किनारे से नीचे गिर गया। सिर में गंभीर चोट आने से उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई। घटना शाम करीब 6:30 बजे की है।

हर साल चेतावनी, फिर भी नहीं थमता चाइनीज मांझे का कहर

प्रदेश में चाइनीज मांझा पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद हर साल मकर संक्रांति पर यही हालात बनते हैं। हादसों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लापरवाही, अवैध मांझा और कमजोर निगरानी जानलेवा साबित हो रही है।

प्रशासन की सख्ती और आम लोगों की जागरूकता ही इन मौतों और हादसों पर लगाम लगा सकती है, वरना त्योहार यूं ही खुशियों की जगह मातम में बदलते रहेंगे।

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