भवंस प्रोमिनेंट स्कूल पर बिना सूचना नौकरी से हटाने का आरोप, पुलिस और श्रम विभाग में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सीएम हेल्पलाइन पहुंचा मामला

द पब्लिकेट, इंदौर। शहर के निपनिया स्थित भवंस प्रोमिनेंट स्कूल में फुटबॉल कोच को बिना पूर्व सूचना पद से हटाने और बकाया वेतन मांगने पर स्कूल परिसर में प्रवेश से रोकने का मामला सामने आया है। प्रभु नगर निवासी अक्षत (पिता स्व. शैलेश पांचाल) ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए विभिन्न अधिकारियों के समक्ष शिकायत की है। उनका दावा है कि स्कूल में काम करने के दौरान का करीब 51,100 रुपए वेतन अब तक बकाया है, लेकिन भुगतान मांगने पर उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

नवंबर 2024 से कर रहे थे काम

शिकायत के अनुसार, अक्षत नवंबर 2024 से भवंस प्रोमिनेंट स्कूल में फुटबॉल कोच के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि वर्ष 2026 में स्कूल प्रशासन ने उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के पद से हटा दिया। अक्षत का कहना है कि जब उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए अपना बकाया वेतन मांगा, तो प्राचार्या ने उन्हें स्कूल परिसर में आने से मना कर दिया। इसके बाद से वह अपने बकाया भुगतान के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।

पुलिस से लेकर श्रम विभाग तक लगाई गुहार

मामले में अक्षत ने अपने अधिवक्ता कपिलवर्धन चौधरी और यश संजीव उपाध्याय के माध्यम से थाना लसूड़िया, सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय और पुलिस आयुक्त कार्यालय में लिखित शिकायतें प्रस्तुत कीं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें श्रम आयुक्त कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने श्रम विभाग का रुख किया।

10 दिन बाद भी कार्रवाई का इंतजार

अक्षत का आरोप है कि श्रम आयुक्त कार्यालय में अधिकारी पूर्णिमा चूरीहार के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए 10 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं हुई है। पुलिस और श्रम विभाग में शिकायत के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतकर्ता ने अधिकारियों की कथित निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए स्कूल प्रबंधन के साथ मिलीभगत की आशंका जताई है। हालांकि, इस संबंध में स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि शिकायत पर संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करते हैं और बकाया वेतन के मामले में पीड़ित को कब तक राहत मिलती है।

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