द पब्लिकेट, इंदौर। शहर में सड़क और ड्रेनेज निर्माण को लेकर कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे के धरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। लेकिन अब सवाल यह उठता है जिस सड़क का काम लंबे समय से लंबित था, उसे शुरू कराने के बाद मौके पर राजनीतिक प्रदर्शन क्यों किया ?
बताया जा रहा है कि संबंधित सड़क का काम करीब 14 से 20 वर्षों से लंबित था और लगभग 15 साल से सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा था। अब नए महापौर के कार्यकाल में इसका काम शुरू कराया गया है। निर्माण के दौरान सड़क के एंट्री और एग्जिट मार्ग को बैरिकेडिंग कर बंद किया गया है, क्योंकि मौके पर सड़क और ड्रेनेज का काम चल रहा है।
इसी बीच चिंटू चौकसे के करीब 55 लाख रुपये की फॉर्च्यूनर कार से मौके पर पहुंचने और वहां कार फंसने का वीडियो बनाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। बता दें कि जब रास्ता पहले से बंद है और निर्माण कार्य चल रहा है, तो मौके पर कार लेकर पहुंचने और वीडियो बनाने का उद्देश्य क्या था?
ड्रेनेज के लिए 2 करोड़ रुपये स्वीकृत होने का दावा
बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर चौकसे धरना दे रहे हैं, वहां पहले से ड्रेनेज का काम चल रहा है और इसके लिए करीब 2 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। निर्माण कार्य के चलते मौके पर गड्ढे और कीचड़ होना स्वाभाविक है।
निर्माणाधीन स्थल पर धरना देकर महापौर को घेरने और उनकी छवि को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विकास कार्य के दौरान आने वाली असुविधा को मुद्दा बनाकर राजनीति करना उचित नहीं है।
विधायक से सवाल क्यों नहीं?
पूरे मामले में एक और राजनीतिक सवाल उठाया गया है। क्षेत्र में लंबे समय से विधायक मौजूद हैं, ऐसे में वर्षों से लंबित सड़क और अन्य विकास कार्यों को लेकर पहले उनसे सवाल किए जाने चाहिए थे। कुछ साल पहले महापौर के आने के बाद उनके द्वारा शुरू कराए जा रहे कामों पर ही सवाल उठाना राजनीतिक मंशा की ओर इशारा करता है।
15 साल से लंबित सड़क का काम अब शुरू कराया जा रहा है, तो आखिर इसका विरोध क्यों किया जा रहा है? क्या लंबे समय से अटके विकास कार्य को शुरू कराना गलत है?

