द पब्लिकेट, इंदौर। शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल Maharaja Yeshwantrao Hospital (एमवाय हॉस्पिटल) में कार्यरत कर्मचारियों के सामने इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अस्पताल में काम करने वाले कई कर्मचारियों को पिछले दो से तीन महीनों से वेतन नहीं मिला, जिससे उनके सामने घर चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है।

कर्मचारियों का कहना है कि उनका वेतन Bharat Vikas Group (बीवीजी) के माध्यम से दिया जाता है, लेकिन लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और किराए जैसी जरूरी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वेतन को लेकर परेशान कर्मचारी लगातार संबंधित अधिकारियों को कॉल और मैसेज कर रहे हैं, लेकिन उनका आरोप है कि न तो कॉल उठाए जा रहे हैं और न ही संदेशों का जवाब दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, कई बार कार्यालय पहुंचने पर भी जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद नहीं मिलते।

पिछले शुक्रवार को नाराज कर्मचारी अपनी समस्या लेकर MGM Medical College Indore के डीन कार्यालय पहुंचे, ताकि अपनी पीड़ा सीधे प्रशासन तक पहुंचा सकें। हालांकि, डीन के उपलब्ध नहीं होने के कारण कर्मचारियों को निराश होकर बिना समाधान के ही वापस लौटना पड़ा।

कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है और वे जल्द से जल्द बकाया वेतन जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण सेवा में काम करने के बावजूद यदि कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिले तो उनका मनोबल भी प्रभावित होता है।

जानकारी के अनुसार Bharat Vikas Group पहले से ही कुछ मामलों में ब्लैकलिस्ट में शामिल बताया जा रहा है। इसके बावजूद एमवाय हॉस्पिटल की व्यवस्था का टेंडर इसी कंपनी को दिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इसी कारण व्यवस्थाओं और वेतन भुगतान में लगातार समस्याएं सामने आ रही हैं।

सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी का रवैया सख्त है। कर्मचारियों के ह्वाट्सऐप ग्रुप पर अगर कर्मचारी सैलरी की बात करते है तो जिम्मेदार अधिकारी अभय उनको ग्रुप से बाहर कर देता है। वहीं, यह भी जानकारी समाने आई है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते मामला हर बार दब जाता है, क्योंकि राजनीतिक व्यक्ति ही अपने खुद के गुर्गों को कर्मचारी के रूप में लगा रहे है।

इस संबंध में जब मीडिया टीम ने वेतन भुगतान को लेकर कंपनी के जिम्मेदारों विवेक और अभय से संपर्क करने की कोशिश की, तो उनके मोबाइल नंबरों पर कई बार कॉल किए गए, लेकिन किसी ने भी कॉल रिसीव नहीं किया।

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