द पब्लिकेट, उज्जैन। फर्जी सिम लेकर शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करने के नाम पर सैकड़ों लोगों से पैसा ऐंठने वाले ठगरों को खाराकुआं थाने में पदस्थ हवलदार ने दूसरे थाना क्षेत्र के आकर दबोचा। ठगोरों से केस न बनाने के नाम पर रुपए लेने के लिए सुबह से लेकर शाम तक थाने के बजाए कहीं ओर रुकवाया और करीब लाख रुपए लेकर छोड़ दिया। मामले में भ्रष्ट पुलिसकर्मी पर कार्रवाई होना चाहिए।
सूत्रों ने बताया कोतवाली थाना क्षेत्र में किरसागर इलाके में स्काई कॉमिडिटी के नाम से फर्जी एडवाइकरी संचालित हो रही थी। इसका संचालक ठगोरे श्लोक विकल और शाश्वत विकल कर रहे थे। इस मामले की जानकारी पूर्व में कोतवाली थाने में पदस्थ वीरेंद्र सिंह देवरा के पुलिसकर्मी को लगी जो अब खाराकुआं थाने में पदस्थ है। दो दिन तक पुलिसकर्मी वीरेंद्र ने फर्जी एडवाइकरी को ट्रेस किया और दूसरे दिन दबिश दे दी। पुलिसकर्मी बाकायदा दो महिला पुलिसकर्मी भी साथ लेकर पहुंचा था। किसी को कानों-काम खबर नहीं हो इसलिए फोटो-वीडियो भी नहीं बनाए थे। दोपहर को दबिश के बाद पकड़ाए लोगों में ठगोरा संचालक शाश्वत भी था जिसने पुलिसकर्मी से शुभ लाभ करना फायदेमंद समझा। शाम होने तक भी कोतवाली थाने में खबर नहीं थी कि थाने के नाम से दूसरे थाने के हवलदार इलाके में आकर दबिश दी है। संचालक शाश्वत ने शाम तक करीब लाख रुपए की व्यवस्था की और पुलिसकर्मी वीरेंद्र को देकर रवाना हो गया। मामले में खास बात यह कि जिस फर्जी एडवाइकरी में पुलिसकर्मी ने दबिश दी थी वहां पर करीब तीन महीने पहले भी रेड पड़ चुकी है उसके बावजूद इलाके में खुलेआम फर्जी एडवाइकरी संचालित हो रही है।
बाहर से ताला लगाकर चलती है एडवाइजरी
सूत्रों ने बताया इलाके की एक बिल्डिंग में अवैध रुप से एडवाइजरी चलती है। सुबह फर्जी एडवाइजरी में काम करने वाले करीब 15-20 युवक-युवतियां बिल्डिंग के अंदर बारी-बारी से जाते है जिसके बाद बाहर से शटर लग जाता है। नीचे एक गुमटी है जहां से पुलिस के आने-जाने की खबर पता चल जाती है। शाम होते ही सभी स्टाफ रवाना होता है। इसके लिए संचालक शाश्वत और श्लोक थाने में मोटी रकम देते है।

