द पब्लिकेट, इंदौर। गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन माँ त्रिपुरा सुंदरी का होता है। त्रिपुरा सुंदरी दस महाविद्याओं में से त्रतीय महाविद्या है, जिन्हें उनके भक्त कई नाम से पहचानते है जैसे कि ललिता, षोडशी, कामाक्षी, राजराजेश्वरी और महेश्वरी। यह देवी त्रिगुणना का तांत्रिक स्वरूप है। 

तृतीय दिवस : त्रिपुरा सुंदरी काली का रक्तवर्णा रूप है। त्रिपुरा सुंदरी धन, ऐश्वर्य, भोग और मोक्ष्य की अधिष्ठात्री (मार्गदर्शन) देवी है। कहा जाता है कि भगवती त्रिपुरा सुंदरी के आशीर्वाद से साधक को भोग और मोक्ष्य सहज उपलब्ध हो जाते है। भैरवयामल और शक्तिलहरी मेंत्रिपुरा सुंदरी उपासना विस्तृत वर्णन मिलता है। 

क्या भोग चढ़ाएं : त्रिपुरा सुंदरी का भोग सात्विक होता है जिसमें खिचड़ी, दूध, दही, मिष्ठान होते है जिससे की व्यवसाय में वृद्धि तथा सुख-समृद्धि बनी रहती है। 

बेहतर जीवन के लिए उपाए: माँ को कमल के फूल अर्पित करें तथा श्रृंगार सामिग्री भेट करें जिससे की जीवन में तरक्की मिले। इसके अलावा अगर आप आज के दिन पिले रंग के वस्त्र पहनते है तो उसके भी कई लाभ है। 

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