द पब्लिकेट, इंदौर। गुप्त नवरात्रि छिन्नमस्तिका देवी का माना जाता है। यह माँ तांत्रिक ज्ञान देवी में से एक है। उन्हें, स्वयं हृदय देवी के रूप में जाना जाता है।

षष्टम (छटा) दिवस : षष्ठम महाविद्या (छठी महाविद्या) माँ छिन्नमस्तिका है, जो स्वयं अपना सिर काट चुकी देवी हैं और अहंकार के विखंडन तथा द्वैत के पारगमन का प्रतीक हैं। तांत्रिक शक्तिवाद में वे दशा महाविद्या (दस ज्ञान देवियों)का हिस्सा हैं। मान्यता है कि छिन्नमस्ता महाविद्या सकल चिंताओं का अंत करती है और मन में चिन्तित हर कामना को पूरा करती है।

क्या भोग चढ़ाएं : आमतौर पर तीव्र ऊर्जा और मुक्ति का प्रतीक वस्तुएँ शामिल होती हैं, जिनमें अक्सर उड़द दाल (काली चना) से बने व्यंजन, विशेष मिठाइयाँ, काला नमक और पका हुआ भोजन शामिल होता है, जो उनके उग्र तांत्रिक स्वभाव को दर्शाता है।

बेहतर जीवन के उपाए : माँ को लाल वस्त्र तथा लाल फूल अर्पित करने से व्यक्ति के जीवन से चिंता और भय का नाश होता है। 

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