द पब्लिकेट, इंदौर। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) की प्रदेश कार्यकारिणी सूची जारी होने के बाद इंदौर की सियासत में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। सूची में नामों के चयन को लेकर कई युवा नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है, खासकर उन कार्यकर्ताओं में जिन्होंने लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई है।

सूत्रों के मुताबिक, इंदौर के नयन दुबे को सूची में अपेक्षित स्थान नहीं मिला, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर पार्टी संगठन तक लगातार सक्रियता दिखाई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरुआत कर उन्होंने भाजपा में अपनी अलग पहचान बनाई और जमीनी स्तर पर मजबूत टीम भी खड़ी की। बावजूद इसके, उन्हें अपेक्षा के अनुरूप जिम्मेदारी नहीं दी गई।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इसका प्रमुख कारण गुटबाज़ी और अंदरूनी विरोध है। जिस नेता के वे समर्थक माने जाते हैं, उनका प्रदेश स्तर पर विरोध होना भी इस फैसले की वजह बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि खेमेबाज़ी के चलते न केवल नेता, बल्कि उनके समर्थकों को भी आगे बढ़ने से रोका जा रहा है।

इंदौर के युवा नेता नयन दुबे का नाम सूची आने से पहले चर्चाओं में था। संगठन में उनकी सक्रियता और लंबे समय तक दिए गए योगदान को देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि, सूची में उन्हें अपेक्षित स्थान नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में असंतोष है। वहीं, यह भी सवाल उठ रहे हैं कि संगठन ने ऐसे चेहरों को प्राथमिकता दी है जो पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय नहीं थे। 

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