द पब्लिकेट, इंदौर। अमेरिकी क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर 55 लाख रुपये की ठगी के मामले में भाजपा नेता का करीबी बंटी शर्मा अब तक राज्य साइबर सेल की गिरफ्त से बाहर है। मामले में साइबर सेल ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन मुख्य बिचौलिया बंटी शर्मा के फरार होने से जांच एजेंसियों की परेशानी बढ़ गई है। बताया जा रहा है दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस से बचने के लिए बंटी शर्मा ग्वालियर भागा है। 

जगजीवन राम नगर निवासी प्रॉपर्टी कारोबारी हितेश प्रधान ने साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके साथ क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की गई। हितेश ने हाल ही में एक प्लॉट बेचा था और उसी रकम से टोयोटा फॉर्च्यूनर खरीदने की योजना बना रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात भाजपा नेता के करीबी और एमआईजी कॉलोनी निवासी बंटी शर्मा से हुई।

दोगुना मुनाफे का लालच

बंटी शर्मा ने हितेश को अमेरिकी क्रिप्टो करेंसी में 55 लाख रुपये निवेश करने पर रकम दोगुनी होने का झांसा दिया। इसके बाद 64 हजार से अधिक यूएसडीटी (USDT) खरीदवाई गई। बाद में ‘कॉइन ऑथेंटिकेटर’ के नाम से भेजी गई एक लिंक के जरिए पूरी क्रिप्टो करेंसी दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर कर ठगी को अंजाम दे दिया गया।

दो आरोपी गिरफ्तार, बंटी शर्मा फरार

मामले की जांच के दौरान साइबर सेल ने आरोपी मुर्तजा शैफी (48), निवासी खातीवाला टैंक, और ताहिर महूवाला (22), निवासी बोहरा कॉलोनी, केट रोड, राऊ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि बंटी शर्मा के कहने पर मुर्तजा ने 55 लाख रुपये में 65 हजार यूएसडीटी खरीदी थी, जो ताहिर के माध्यम से ट्रांसफर कराई गई।

बाद में बंटी शर्मा ने यूएसडीटी चेक करने के बहाने हितेश को एक फर्जी लिंक भेजी और उसी के जरिए पूरा डिजिटल फंड दूसरे वॉलेट में ट्रांसफर कर लिया गया।

ट्रस्ट वॉलेट एप के जरिए ठगी

निरीक्षक अंजू पटेल के अनुसार ट्रस्ट वॉलेट एक मोबाइल एप है, जिसे डाउनलोड करने के बाद क्रिप्टो करेंसी खरीदी, बेची और स्टोर की जा सकती है। इसी तकनीक का दुरुपयोग कर पीड़ित से धोखाधड़ी की गई। फिलहाल साइबर सेल की टीमें फरार आरोपी बंटी शर्मा की तलाश में जुटी हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।

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