द पब्लिकेट। देश में स्वच्छता अभियान के दस साल बाद भी जमीनी हकीकत पूरी तरह नहीं बदली है। एक ओर भारत में करोड़ों शौचालयों का निर्माण हुआ और स्वच्छता सुविधाओं का विस्तार हुआ, वहीं दूसरी ओर लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों बच्चे आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट ने स्वच्छता की इसी तस्वीर को सामने रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में करीब 2 करोड़ बच्चों को हाथ धोने की बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहीं, दुनिया भर में लगभग 25 करोड़ बच्चे स्कूलों में शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। भारत के अलावा नाइजीरिया, इथियोपिया, कांगो और इंडोनेशिया में भी स्वच्छता की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

दस साल में सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

वर्ष 2015 से 2025 के बीच भारत में स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। देश में करीब 14 करोड़ शौचालयों के निर्माण का दावा किया गया है। इसके बावजूद स्वच्छ पेयजल, हाथ धोने की सुविधा और शौचालयों के नियमित उपयोग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 62 देशों में शामिल है, जहां पिछले एक दशक में स्वच्छता के क्षेत्र में सुधार हुआ है।

2030 तक लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुमानों के अनुसार, मौजूदा रफ्तार से काम जारी रहा तो वर्ष 2030 तक स्वच्छता से जुड़े सभी लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा। पानी की सुविधाओं के क्षेत्र में 84 फीसदी, स्वच्छता में 81 फीसदी और अन्य संबंधित सुविधाओं में 79 फीसदी लक्ष्य ही पूरे हो पाने का अनुमान है। निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए मौजूदा रफ्तार को तीन गुना बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।

स्वच्छता के क्षेत्र में भारत ने बीते एक दशक में उल्लेखनीय विस्तार किया है, लेकिन स्कूलों में बच्चों को साफ पानी, शौचालय और हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध कराना अब भी बड़ी चुनौती है।

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